सियासत (राजनीति)
✍️सियासत (राजनीति)✍️ अकेला जो चला मारा गया है चांद सूरज से उतारा गया है मोड़ ली जिसने घुटने की हड्डी खास उसको ही पुकारा गया है जिसकी गर्दन झुकी प्यारा वही है उसे जूतों से दुलारा गया है खड़ी गर्दन का ये अंजाम हुआ उसका सर धड़ से उतारा गया है वो फिर सीना फुलाए फिरते हैं कोई सीमा पे फिर मारा गया है तुमको गद्दी मिली सियासत में उसकी तो आंख का तारा गया है जिसने सीने को खुलेआम किया जख्म पे जख्म दुबारा गया है जो बहादुर है इस दुनिया में “विनय” उसे मूरख भी...