✍️सियासी✍️
वो अपनी नाक को नीचा जरा होने नहीं देता
भलाई बांटता है पर भला होने
नहीं देता
खिलौना तोड़कर बच्चे का वो ऐसे हंसाता है
बड़ा जालिम है मारता है और रोने
नहीं देता
बचत खाते की गुल्लक में वो पैसे
झांक लेता है
गरीबों को गरीबों में खड़ा होने
नहीं देता
मंगाई ताश की गड्डी और जोकर उछाला है
बता बेगम है या इक्का हुक्म उसका निराला है
“विनय” जालिम कहूं उसको या उसको देवता समझूं
ख्वाब जन्नत के बोता है मगर सोने
नहीं देता
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