✍️काम से जाना जाए✍️
क्या जरूरी है के पहचान से जाना जाए
उगते सूरज को उसके नाम से जना जाए
छुपे बैठे हैं कई नाग सफ लिबासों में
इन लिबासों को अब अंजाम से जाना जाए
मान देना भी तो एक उम्र का तकाजा है
ये तकाजा भी अब ईमान से जाना जाए
कभी आओ हमारी आंख के दरवाजे तक
आओ तुमको भी इत्मिनान से जाना जाए
गधे घोड़े को रंग दो एक सा कर दो बेशक
मगर फितरत को उसकी शान से जाना जाए
ये जो तुफां है ये तुफां है हवा के दम पर
हवा के नाम इस तुफान को जाना जाए
ढोए जायेंगे कब तक विरासत के बोझ “विनय”
नई पीढ़ी को अपने काम से जाना जाए
कब तलक ढोओगे कमजर्फ के जूतों को “विनय”
अब इन जूतों को उनकी आन से जाना जाए
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