✍️ मदारी (मुकद्दर) ✍️ जाने कितने रोज बकरे दुलारे जाते हैं जाने कितने रोज छलते हैं मारे जाते हैं उस्तरे को उसे तुम खुद ही धार देते हो बाल के धोखे में फिर सर उतारे जाते हैं इसके उसके जहां में जिसके भी घर लुटते हैं लोग हर हाल में अपने ही मारे जाते हैं ऐसे देखे हैं झोली वाले मदारी हमने ताज ठोकर में राजा भी उतारे जाते हैं जिसको कहते हैं नसीहत वही मुकद्दर है जिसके फन में हो इशारे सुधारे जाते हैं झेल जाते...
✍️गम (तरक्की)✍️ मुझको दुनिया की, इस बात पर रोना आया मरा भूखा, तो मखमल का बिछोना आया ✍️✍️ रात कटती थी, दिन के अंगार लिए आंखों में बड़ी मुश्किल से, उसे चैन से सोना आया ✍️✍️ चलो मर कर ही सही, तुमको दया तो आई उसके बच्चों की, तश्तरी में तो खाना खाया ✍️✍️ कभी बैलों से थे बाबस्ता,अब खुद बैल हैं हम वक्त बदला तो, फिर यूं बदला जमाना आया ✍️✍️ गम तरक्की है, तरक्की की नाशानी है “विनय” गम की तासीर से,तुमको भी कुछ लिखना आया #विनय_आजाद #yqdidi #yqhindi #writervinayazad #गम #तरक्की Read my thoughts on YourQuote app at https://www.yourquote.in/vinay-tyagi-bekbv/quotes/gm-trkkii-mujhko-duniyaa-kii-baat-pr-ronaa-aayaa-mraa-mkhml-bgcqgl
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